पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व in hindi |2021|paryavaran shiksha ki avashyakta aur mahatv|

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पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व in hindi |2021|paryavaran shiksha ki avashyakta aur mahatv|

 

पर्यावरण शिक्षा – (Environmental education)

 

मानव एक सामाजिक प्राणी है समाज के पर्यावरण में ही उसका जन्म होता है और उसी में मृत्यु । मनुष्य को जैसा वातावरण प्राप्त होता हैं, उसी के अनुसार उसका विकास होता है मनुष्य को प्रकृति का बेटा माना जाता है क्योंकि प्रकृति ही उसका जन्मदात्री है उसी की गोदी में विचरण कर वह चर्मोत्कर्ष को प्राप्त होता हैं । पर्वत,नदी,तालाब,हरीतिमा से पूर्ण शयमला भूमि,सुगन्धित वायु हमारे जीवन को सुंदर तथा सुखद बनाती हैं। प्रकृति हमे समय-समय पर परिस्थितियों के अनुसार ममतामयी माता के समान सुरक्षा प्रदान करती हैं। मगर दुर्भाग्य की मनुष्य प्रकृति पर ही विजय प्राप्त करने की इच्छा करने लगा । औधोगिक विकास में मदमस्त मानव ने प्रकृति के नियम को चुनौती माना और यंही से मानव और प्रकृति में संघर्ष प्रारंभ हुआ जिसके परिणामस्वरूप प्रकृति में मनुष्य के हस्तक्षेप ने प्रकृति के संतुलन समायोजन के स्वरूप को विकृत मर दिया हैं। मानव यदि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर चलता तो मानव जीवन एंव सृष्टि दोनो ही स्वस्थ रहते हैं।पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व in hindi |2021|paryavaran shiksha ki avashyakta aur mahatv|

आज हमारा पर्यावरण जीवन रक्षक के स्थान पर मारक बनता जा रहा हैं तब हमे पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। आज विष्व के सभी देश किसी न किसी प्रकार की पर्यवणीय समस्या से जूझ रहे हैं। प्रकृति ने हमे अनेक प्राकृतिक संसाधन अत्यधिक मात्रा में प्रदान किये हैं, जैसे- वायु,भूमि,खनिज सम्पदा इत्यादि,मगर प्राकृतिक संसाधनों का जिस निर्ममता से शोषण हुआ है, उससे जो प्रकृति के संचित कोष रिक्त हो रहे हैं,उसे वापस पूरा नही किया जा सकता हैं।

 

पर्यावरण का अर्थ- (Meaning of the environment)

 

मनुष्य को छोड़कर उसके चारों तरफ जो कुछ भी हैं, वह पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण को वातावरण के रूप में भी जाना जाता हैं। पर्यावरण दो शब्दों का मेल से बना है – परि + आवरण = “पर्यावरण”। परि का अर्थ है चारो तरफ से,”आवरण ” शब्द का अर्थ है ढ़के हुए अर्थात चारो ओर से ढँके हुए। इस प्रकार मनुष्य के चारो ओर जो कुछ भी हैं – वह उसका पर्यावरण हैं। 

 

रॉस (ROSS) – कोई भी बाहरी शक्ति जो हमे प्रभावित करती हैं, पर्यावरण कहलाती हैं।

 

गिसवेंट (Gisswent) – कोई भी वह वस्तु जो किसी वस्तु को चारों ओर से घेरती हैं एंव उस पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालती हैं, वह पर्यावरण कहलाती हैं।

 

प्राणी और पर्यावरण दोनो को एक दूसरे से विलग नही किया जा सकता हैं। जैसे कि – खेत मे पड़ा हुआ बीज भूमि,जल,वायु,हल,किसान,सूर्य का प्रकाश इत्यादि से घिरा हुआ है, उसका पर्यावरण हुआ बीज जो कि एक जीवंत वस्तु हैं, को छोड़कर उसके चारों ओर जो हैं वह सब पर्यावरण हैं। पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व in hindi |2021|paryavaran shiksha ki avashyakta aur mahatv|

 

जीवन तथा पर्यावरण वास्तव में एक दूसरे के पूरक हैं तथा परस्पर सम्बन्धित हैं। प्राणी और पर्यावरण दो वस्तुएं नही हैं। इन्हें एक दूसरे से अलग नही किया जा सकता हैं।

पर्यावरण शिक्षा का अर्थ – (Meaning of environmental education)

पर्यावरणीय शिक्षा वह शिक्षा है जो वातावरण (पर्यावरण) के माध्यम से पर्यावरण के विषय मे पर्यावरण के लिये ही होती हैं। पर्यावरण जड़ एंव चेतन दोनों को ही शिक्षा देने वाला है। प्रकृति ही मनुष्य को महान शिक्षा देने वाली शिक्षिका होती है। शिक्षा का कार्य है कि – मनुष्य को उसके (वातावरण के) अनुकूल ढालना जिससे वह जीवित रह सके और शिक्षा मनुष्य के पर्यावरण को अपने अनुकूल बदलने का भी प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।

 

” पर्यावरण शिक्षा” वस्तुतः विश्व समुदाय को पर्यावरण सम्बन्धी दी जाने वाली वह शिक्षा है जिससे वे समस्याओं से अवगत होकर उनका खोज सके तथा साथ ही आगामी भविष्य में आने वाली समस्याओं को रोक सकें।

 

विभिन्न शिक्षाशास्त्रीयो ने पर्यावरण की भिन्न-भिन्न परिभाषाएं दी हैं – 

 

1 – U.G.C – पर्यावरण शिक्षा वह शिक्षा हैं, जिसमें मनुष्य अपने को समाप्त भौतिक तरीको को एक अंग के रूप में देखे तथा मनुष्य पर्यावरण के मध्य अनुरूपता की आवश्यकता को समझे।

 

2 – N.C.E.R.T – पर्यावरणीय शिक्षा लोगो तथा सामाजिक व भौतिक वातावरण के प्रति उनकी पारस्परिक क्रिया से सम्बंधित हैं।

 

3 – संयुक्त राज्य अमेरिका पर्यावरणीय शिक्षा अधिनियम 1970 में कहा गया है कि – “वातावरण (पर्यावरण) शिक्षा वह शैक्षिक प्रक्रिया है जो मानव का सम्बंध प्राकृतिक तथा मानव निर्मित पर्यावरण के साथ बताती है तथा जिसमें जनसंख्या प्रदूषण साधनों की उपलब्धि और अभाव,संरक्षण, परिवहन, तकनीकी तथा शहरी एंव ग्रामीण योजनाओं का सम्पूर्ण पर्यावरण के साथ संबंध भी सम्मिलित हैं।

 

4 – पर्यावरणीय शिक्षा पर्यावरणीय संरक्षण के लक्ष्यों को लागू करने का एक ढंग हैं। यह विज्ञान की एक पृथक ,शाखा या कोई पृथक अध्ययन विषय नह हैं। इसको जीवन प्रयत्न एकीकृत शिक्षा के सिद्धांत के रूप में लागू किया जाना चाहिए।

 

5 – माध्यमिक शिक्षा आयोग – इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र,नागरिक शास्त्र आदि को एक इकाई के रूप में देखना चाहिए। इस एकीकृत स्वरूप की विषय-सामग्री ऐसी हो जो छात्रों को सामाजिक वातावरण में व्यवस्थित कर सके।

 

पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्य एंव लक्ष्य – (The purpose of environmental education and target)

“पर्यावरण शिक्षा का लक्ष्य इस प्रकार की विश्व जनता तैयार करना है जो पर्यावरण तथा उससे संबंधित समस्याओं के प्रति जागरूप तथा चिंतित हैं तथा जिसमे व्यक्तिगत एंव सामुहिक रूप से कार्य करके तत्कालीन समस्याओं के समाधान तथा नई समस्याओं को रोकने के लिए ज्ञान,कौशल,अभिवृत्ति, प्रेरणा तथा समपर्ण की भावना हैं।

 

1.जागरूकता  सम्पूर्ण पर्यावरण, व्यक्तियों तथा इससे सम्बंधित समस्याओं के लिये संवेदना व जागरूकता उत्पन्न करना पर्यावरण शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हैं।

 

2.ज्ञान  सम्पूर्ण पर्यावरण उससे सम्बंधित समस्याओं तथा इसमें मानवता की दायित्वपूर्ण उपस्थिति तथा भूमिका के विषय मे आधारभूत समझ उत्पन्न करना पर्यावरण शिक्षा का दूसरा उद्देश्य है।

 

   पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता- (Environmental education requirement)

पर्यावरण प्रदूषण एक विश्वव्यापी समस्या है। इससे कोई भी क्षेत्र अछूता नही है। नगरों व औधोगिक क्षेत्रों में प्रदूषण भीषण रूप धारण करता जा रहा है यँहा तक कि इन समस्याओं से ग्रामीण क्षेत्र भी अछूत नही रह सके हैं। औद्योगिक दृस्टि से विकसित देशों में जंहा यह पहले ही चरम सीमा पर पहुंच चुका है, वही विकासशील देशों में यह उत्तरोत्तर वृद्धि पर है। यदि इस समस्या पर शीघ्रताशील काबू नही पाया गया तो भंयकर परिणाम दृष्टिगत होंगे। इन्हीं समस्याओं पर ध्यान देने हेतु पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। निम्न बिंदुओं पर हम विचार करेंगे-

 

  1. राष्ट्रीय विकास के लिये,
  2. आर्थिक समृद्धि के लिये,
  3. सामाजिक स्तर की उन्नति व सामाजिक समायोजन के लिए,
  4. प्राकृतिक सम्पदाओं से लाभ उठाने के लिये,
  5. सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये,
  6. मानवीय मूल्यों के विकास के लिये,
  7. जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए,
  8. नवीन तकनीकियो के लिये प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग जानने हेतु,
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   पर्यावरण शिक्षा का महत्व- (importance of environmental education) 

पर्यावरण शिक्षा निरन्तर प्रगति कर रही हैं। इसकी लोकप्रियता एंव मान्यता भी सभी स्थानों पर बढ़ रही हैं। स्वतंत्रता के पूर्व शिक्षा पूर्णतया पुस्तकीय तथा सूचनात्मक थी। बालको को शिक्षा प्रदान करने का प्रमुख उद्देश्य केवल क्लर्क उत्तपन्न करना था। शिक्षा को जीवन की सामाजिक तथा सांस्कृतिक आवश्यकताओ से परखा जाता था। अन्य शब्दो मे शिक्षा मूल रूप से जीविकोपार्जन से उद्देश्य से प्रभावित थी। परिणामस्वरूप केवल भाषा,गणित तथा भौतिक विज्ञान को ही पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाता हैं। समाजिक विषयो की अपेक्षा की जाती थी। कारण की उनका कोई व्यावसायिक महत्व नही था। आगे चलकर भूगोल,इतिहास तथा नागरिक शास्त्र  को भी पाठ्यक्रम में स्थान डिय5 जाने लगा। परन्तु इन विषयों को पाठ्यक्रम में स्थान देने का मूल उद्देश्य संस्कृतिक था,समाजिक नही।

 

पर्यावरणीय अध्ययन के महत्व व्यक्तिगत तथा सामाजिक दृस्टि से निम्नलिखित हैं – 

 

1 :- यह विषय छात्रों के मानसिक विकास में विशेष रूप से सहायक होते हैं।

 

2 :- इसके द्वारा छात्रों को अधिकारों तथा कर्तव्यों का समुचित ज्ञान कराया जा सकता है।

 

3 :- यह छात्रों के सामाजिक चरित्र के विकास में योगदान देता हैं।

 

4 :- प्रेम,सहयोग, सहकारिता जैसे गुणों का विकास इसके अध्ययन द्वारा ही होता हैं।

 

5 :- यह छात्रों को उत्तरदायित्व की शिक्षा प्रदान करता है।

 

6 :- यह विषय छात्रों को सामाजिक वातावरण में अनुकूल करने की शिक्षा देता हैं।

 

7 :- पर्यावरणीय अध्ययन द्वारा छात्र देश की विभिन्न समस्याओं का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

 

8 :- भारतीय संस्कृति का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिये यह विषय परम् आवश्यक है।

 

9 :- समाज की विभिन्न संस्थाओं,समुदायो आदि का भी ज्ञान कराने में यह विषय विशेष सहायक है।

 

10 :- इसके अध्ययन से देश-प्रेम ,विश्व-बंधुत्व की भावनाओं का विकास होता हैं।

 

11 :- पर्यावरणीय अध्ययन में अन्य विषयों को समन्वित करके पढ़ाया जाता है अतः छात्र ज्ञान की अखंडता का बोध करते हैं।

 

12 :- समाजिक स्तर को ऊँचा उठाने तथा समाज के साथ       समायोजन के लिये।

 

13 :- मानवीय मूल्यों के विकास के लिये।

 

14 :- अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये।

 

15 :- नवीन तकनीकियो के लिये प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग जानने के लिये।

 

अब जनसंख्या, परिवार तथा पर्यावरणीय शिक्षा को संयोजित करने पर बल दिया जाने लगा है, जिससे जनसंख्या पर्यावरण प्रत्ययों को वर्तमान स्कूल पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाने वाला विषय बनाया जा सके । इन विषयों के पाठ्यक्रम ,शिक्षण विधियों एंव सहायक सामग्री के विकास की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

अन्त में हम कह सकते हैं कि मनुष्य के अस्तित्व को भौतिक,समाजिक तथा मानसिक रूप से उन्नत बनाने के लिये जिन तत्वों की आवश्यकता होती हैं, वे सभी तत्व प्रकृति में भरे पड़े हैं। परन्तु प्रकृति के तत्व सन्तुलित होकर ही मनुष्य का विकास कर सकते हैं। जब प्रकृति का ही सन्तुलन बिगड़ जाएगा तो मानव भला कैसे बचेगा । इसीलिये प्रकृति के साथ हमने जो किया,यथा – मेघा शक्ति के बल पर पहाड़ो को समतल और संतुलित कर कार्य मे लाना, सागर पाट कर बस्तियां बनाना,जल – थल सुखमय, आरामदायक बनाना इत्यादि। आज उस पर पुनर्विचार की आवश्यकता प्रतीत हुई।

डॉ विद्यानिवास मिश्र के शब्दों में की – “प्रकृति का संरक्षण हम सबका पावन कर्तव्य है। हमें प्रकृति का उतना ही विदोहन करना चाहिए,जिससे उसका सन्तुलन न बिगड़े। यदि मानव अब भी नही चेता तो हमारा विनाश निश्चित है।”

 

मानव को मानव जीवन बचाने के लिये पर्यावरण की स्वच्छता तथा शुद्धता को महत्व देना ही होगा। उन कार्यक्रमों का सक्रिय रूप से क्रियान्वित करना होगा जिससे पर्यावरण प्रदूषित होने से बच सके।

FAQ CHECKLIST

Q : पर्यावरण अध्ययन की आवश्यकता क्या है?
 
Ans : नगरों व औधोगिक क्षेत्रों में प्रदूषण भीषण रूप धारण करता जा रहा है यँहा तक कि इन समस्याओं से ग्रामीण क्षेत्र भी अछूत नही रह सके हैं। औद्योगिक दृस्टि से विकसित देशों में जंहा यह पहले ही चरम सीमा पर पहुंच चुका है, वही विकासशील देशों में यह उत्तरोत्तर वृद्धि पर है। यदि इस समस्या पर शीघ्रताशील काबू नही पाया गया तो भंयकर परिणाम दृष्टिगत होंगे। इन्हीं समस्याओं पर ध्यान देने हेतु पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता महसूस हुई।
 
 
Q : पर्यावरण शिक्षा के क्या उद्देश्य है?
 
Ans : जागरूकता  सम्पूर्ण पर्यावरण, व्यक्तियों तथा इससे सम्बंधित समस्याओं के लिये संवेदना व जागरूकता उत्पन्न करना पर्यावरण शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हैं।
 
Q : पर्यावरण का हमारे जीवन में क्या महत्व है?
 
Ans : पर्यावरणीय अध्ययन के महत्व व्यक्तिगत तथा सामाजिक दृस्टि से निम्नलिखित हैं – 

 

1 :- यह विषय छात्रों के मानसिक विकास में विशेष रूप से सहायक होते हैं।

 

2 :- इसके द्वारा छात्रों को अधिकारों तथा कर्तव्यों का समुचित ज्ञान कराया जा सकता है।

 

3 :- यह छात्रों के सामाजिक चरित्र के विकास में योगदान देता हैं।

 

4 :- प्रेम,सहयोग, सहकारिता जैसे गुणों का विकास इसके अध्ययन द्वारा ही होता हैं।

 

5 :- यह छात्रों को उत्तरदायित्व की शिक्षा प्रदान करता है।

Q : पर्यावरण शिक्षा का क्या अर्थ है?

Ans : पर्यावरणीय शिक्षा वह शिक्षा है जो वातावरण (पर्यावरण) के माध्यम से पर्यावरण के विषय मे पर्यावरण के लिये ही होती हैं। पर्यावरण जड़ एंव चेतन दोनों को ही शिक्षा देने वाला है। प्रकृति ही मनुष्य को महान शिक्षा देने वाली शिक्षिका होती है। शिक्षा का कार्य है कि – मनुष्य को उसके (वातावरण के) अनुकूल ढालना जिससे वह जीवित रह सके और शिक्षा मनुष्य के पर्यावरण को अपने अनुकूल बदलने का भी प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।

 

निष्कर्ष – आशा करता हूं यह पोस्ट आप लोगों को अच्छी लगी होगी और इस पोस्ट में आप लोगो को पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व in hindi |2021|paryavaran shiksha ki avashyakta aur mahatv| के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी अगर यह पोस्ट आप लोगो को अच्छी लगी हो तो अपने मित्रो के साथ शेयर जरूर करे धन्यवाद।

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